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ramayan 4.30.65: जिस प्रकार चकवी (पक्षी) अपने स्वामी के पीछे-पीछे चलता है, उसी प्रकार शुभ्र सीता इस भयंकर और दुर्गम दण्डकारण्य को उद्यान समझकर यहाँ तक मेरे पीछे-पीछे चली आईं।   |   ramayan सर्ग 4.30: शरद्-ऋतु का वर्णन तथा श्रीराम का लक्ष्मण को सुग्रीव के पास जाने का आदेश देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  4.30.65 
चक्रवाकीव भर्तारं पृष्ठतोऽनुगता वनम्।
विषमं दण्डकारण्यमुद्यानमिव चाङ्गना॥ ६५॥
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार चकवी (पक्षी) अपने स्वामी के पीछे-पीछे चलता है, उसी प्रकार शुभ्र सीता इस भयंकर और दुर्गम दण्डकारण्य को उद्यान समझकर यहाँ तक मेरे पीछे-पीछे चली आईं।
 
Just as a Chakwi (bird) follows its master, similarly, the auspicious Sita, considering this dreadful and inaccessible Dandakaranya as a garden, followed me till here.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)