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इयं सा प्रथमा यात्रा पार्थिवानां नृपात्मज।
न च पश्यामि सुग्रीवमुद्योगं च तथाविधम्॥ ६१॥
अनुवाद
नरसनंदन! राजाओं की विजय यात्रा का यह प्रथम अवसर है, किन्तु न तो मैं यहाँ सुग्रीव को उपस्थित देख पा रहा हूँ, न ही उसका ऐसा कोई प्रयास ही देख पा रहा हूँ।
Narasanandan! This is the first occasion of the victory march of the kings, but neither do I see Sugreev present here, nor am I able to see any such effort of his.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥