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ramayan 4.30.43: ‘नदियाँ, बादल, झरनों का जल, तेज हवाएँ, मोर और हर्षविह्वल मेंढकों का शब्द इस समय अवश्य ही शान्त हो गया है ॥ 43॥   |   ramayan सर्ग 4.30: शरद्-ऋतु का वर्णन तथा श्रीराम का लक्ष्मण को सुग्रीव के पास जाने का आदेश देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 30: शरद्-ऋतु का वर्णन तथा श्रीराम का लक्ष्मण को सुग्रीव के पास जाने का आदेश देना  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  4.30.43 
नदीघनप्रस्रवणोदकाना-
मतिप्रवृद्धानिलबर्हिणानाम्।
प्लवंगमानां च गतोत्सवानां
ध्रुवं रवा: सम्प्रति सम्प्रणष्टा:॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
‘नदियाँ, बादल, झरनों का जल, तेज हवाएँ, मोर और हर्षविह्वल मेंढकों का शब्द इस समय अवश्य ही शान्त हो गया है ॥ 43॥
 
‘The sounds of the rivers, clouds, water from waterfalls, strong winds, peacocks and joyless frogs have certainly become silent at this time. ॥ 43॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)