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श्लोक  4.30.40 
त्यक्त्वा वराण्यात्मविभूषितानि
बर्हाणि तीरोपगता नदीनाम्।
निर्भर्त्स्यमाना इव सारसौघै:
प्रयान्ति दीना विमना मयूरा:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
जो मोर अपने सजावटी पंख त्यागकर नदी के किनारे आते हैं, वे सारसों के झुंड की डांट सुनकर उदास और निराश होकर लौट जाते हैं।
 
The peacocks which have come to the riverbanks abandoning their ornamental feathers, on hearing the rebukes from the flocks of cranes, go back sad and dejected.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)