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ramayan 4.30.36: इस समय आकाश का रंग गर्व से आरूढ़ शस्त्रधारी के समान निर्मल दिखाई देता है, नदियों का जल धीरे-धीरे बह रहा है, श्वेत कमल की सुगन्धि लेकर शीतल वायु बह रही है, सम्पूर्ण दिशाओं का अंधकार दूर हो गया है और वे पूर्णतः प्रकाशित हो रही हैं॥ 36॥   |   ramayan सर्ग 4.30: शरद्-ऋतु का वर्णन तथा श्रीराम का लक्ष्मण को सुग्रीव के पास जाने का आदेश देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 30: शरद्-ऋतु का वर्णन तथा श्रीराम का लक्ष्मण को सुग्रीव के पास जाने का आदेश देना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  4.30.36 
व्यक्तं नभ: शस्त्रविधौतवर्णं
कृशप्रवाहानि नदीजलानि।
कह्लारशीता: पवना: प्रवान्ति
तमो विमुक्ताश्च दिश: प्रकाशा:॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
इस समय आकाश का रंग गर्व से आरूढ़ शस्त्रधारी के समान निर्मल दिखाई देता है, नदियों का जल धीरे-धीरे बह रहा है, श्वेत कमल की सुगन्धि लेकर शीतल वायु बह रही है, सम्पूर्ण दिशाओं का अंधकार दूर हो गया है और वे पूर्णतः प्रकाशित हो रही हैं॥ 36॥
 
‘At this time the colour of the sky appears as clear as the bearer of a weapon mounted on a pride, the waters of the rivers are flowing slowly, a cool breeze is blowing carrying the fragrance of the white lotus, the darkness of all directions has disappeared and now they are completely illuminated.॥ 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)