Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 4.30.21: तत्पश्चात् खिले हुए कमलदलों के समान नेत्रों वाली मिथिलापुत्री सीता का बार-बार स्मरण करते हुए भगवान राम ने शुष्क (दुखी) मुख से लक्ष्मण से कहा -॥21॥   |   ramayan सर्ग 4.30: शरद्-ऋतु का वर्णन तथा श्रीराम का लक्ष्मण को सुग्रीव के पास जाने का आदेश देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 30: शरद्-ऋतु का वर्णन तथा श्रीराम का लक्ष्मण को सुग्रीव के पास जाने का आदेश देना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  4.30.21 
अथ पद्मपलाशाक्षीं मैथिलीमनुचिन्तयन्।
उवाच लक्ष्मणं रामो मुखेन परिशुष्यता॥ २१॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् खिले हुए कमलदलों के समान नेत्रों वाली मिथिलापुत्री सीता का बार-बार स्मरण करते हुए भगवान राम ने शुष्क (दुखी) मुख से लक्ष्मण से कहा -॥21॥
 
Thereafter thinking again and again of Sita, the daughter of Mithila, whose eyes were like the blooming lotus petals, Lord Rama addressed Lakshmana and said with a dry (sad) face -॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)