Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.30.18: हे मनुष्यों के स्वामी और श्रेष्ठ पुरुषों द्वारा भी पूजित वीर रघुनन्दन! आप ही के स्वामी जनक की पुत्री सीता किसी अन्य पुरुष के लिए सुलभ नहीं हैं; क्योंकि जलती हुई अग्नि की लपटों के पास जाकर कोई भी बिना जले नहीं रह सकता।॥18॥ | ramayan सर्ग 4.30: शरद्-ऋतु का वर्णन तथा श्रीराम का लक्ष्मण को सुग्रीव के पास जाने का आदेश देना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न जानकी मानववंशनाथ
त्वया सनाथा सुलभा परेण।
न चाग्निचूडां ज्वलितामुपेत्य
न दह्यते वीर वरार्ह कश्चित्॥ १८॥
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी और श्रेष्ठ पुरुषों द्वारा भी पूजित वीर रघुनन्दन! आप ही के स्वामी जनक की पुत्री सीता किसी अन्य पुरुष के लिए सुलभ नहीं हैं; क्योंकि जलती हुई अग्नि की लपटों के पास जाकर कोई भी बिना जले नहीं रह सकता।॥18॥
O lord of the human race and the brave Raghunandan who is revered even by the best of men! Sita, the daughter of Janaka, whose master is you, is not accessible to any other man; because no one can go near the flames of a burning fire and remain without getting burnt.'॥ 18॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥