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ramayan 4.30.10: जिसके बड़े-बड़े नेत्र खिले हुए कमल के पत्तों के समान हैं, उस समय मेरी प्रियतमा की क्या दशा होगी, जब वह अपने चारों ओर विचरण करने वाले पक्षियों की आवाज सुनेगी?॥10॥   |   ramayan सर्ग 4.30: शरद्-ऋतु का वर्णन तथा श्रीराम का लक्ष्मण को सुग्रीव के पास जाने का आदेश देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 30: शरद्-ऋतु का वर्णन तथा श्रीराम का लक्ष्मण को सुग्रीव के पास जाने का आदेश देना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  4.30.10 
नि:स्वनं चक्रवाकानां निशम्य सहचारिणाम्।
पुण्डरीकविशालाक्षी कथमेषा भविष्यति॥ १०॥
 
 
अनुवाद
जिसके बड़े-बड़े नेत्र खिले हुए कमल के पत्तों के समान हैं, उस समय मेरी प्रियतमा की क्या दशा होगी, जब वह अपने चारों ओर विचरण करने वाले पक्षियों की आवाज सुनेगी?॥10॥
 
What would be the state of my beloved, whose large eyes look like blooming lotus leaves, when she would hear the call of the birds roaming around her?॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)