श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 3: हनुमान जी का श्रीराम और लक्ष्मण से वन में आने का कारण पूछना और अपना तथा सुग्रीव का परिचय देना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  4.3.37 
विदिता नौ गुणा विद्वन् सुग्रीवस्य महात्मन:।
तमेव चावां मार्गाव: सुग्रीवं प्लवगेश्वरम्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
विद्वान्! हम महाबली सुग्रीव के गुणों को जान गए हैं। हम दोनों भाई वानरराज सुग्रीव की खोज में यहाँ आए हैं। 37.
 
Learned one! We have come to know the qualities of the great Sugreeva. We two brothers have come here in search of the monkey king Sugreeva. 37.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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