श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 3: हनुमान जी का श्रीराम और लक्ष्मण से वन में आने का कारण पूछना और अपना तथा सुग्रीव का परिचय देना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  4.3.36 
एवमुक्तस्तु सौमित्रि: सुग्रीवसचिवं कपिम्।
अभ्यभाषत वाक्यज्ञो वाक्यज्ञं पवनात्मजम्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
श्री रामचन्द्र जी के ऐसा कहने पर वार्तालाप कला जानने वाले सुमित्रानन्दन लक्ष्मण, सुग्रीव के सचिव पवनकुमार, विषय के सार को समझने वाले कपिवर हनुमान्‌जी ने यह कहा-॥36॥
 
On Shri Ramchandra ji saying this, Sumitranandan Laxman, who knew the art of conversation, Pawan Kumar, Sugriva's secretary, Kapivar Hanuman, who understood the essence of the matter, said this - ॥ 36॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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