श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 3: हनुमान जी का श्रीराम और लक्ष्मण से वन में आने का कारण पूछना और अपना तथा सुग्रीव का परिचय देना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  4.3.35 
एवंगुणगणैर्युक्ता यस्य स्यु: कार्यसाधका:।
तस्य सिद्धॺन्ति सर्वेऽर्था दूतवाक्यप्रचोदिता:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
जिस राजा के दूत ऐसे उत्तम गुणों से युक्त होते हैं, उसकी समस्त इच्छाएं दूतों के वार्तालाप मात्र से ही पूरी हो जाती हैं।'
 
The king whose messengers are endowed with such excellent qualities, all his desires are fulfilled merely by the conversations of the messengers.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)