श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 3: हनुमान जी का श्रीराम और लक्ष्मण से वन में आने का कारण पूछना और अपना तथा सुग्रीव का परिचय देना  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  4.3.34 
एवंविधो यस्य दूतो न भवेत् पार्थिवस्य तु।
सिद्धॺन्ति हि कथं तस्य कार्याणां गतयोऽनघ॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
हे भोले लक्ष्मण! यदि किसी राजा के पास उसके समान दूत न हो, तो वह अपने कार्यों में सफलता कैसे प्राप्त कर सकता है?
 
Innocent Lakshman! How can a king achieve success in his tasks if he does not have a messenger like him?
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd