श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 3: हनुमान जी का श्रीराम और लक्ष्मण से वन में आने का कारण पूछना और अपना तथा सुग्रीव का परिचय देना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  4.3.26 
सचिवोऽयं कपीन्द्रस्य सुग्रीवस्य महात्मन:।
तमेव कांक्षमाणस्य ममान्तिकमिहागत:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
सुमित्रनन्दन! ये महाहृदयी वानरराज सुग्रीव के सचिव हैं और अपना कल्याण चाहने के लिए मेरे पास आये हैं॥ 26॥
 
Sumitra Nandan! He is the secretary of the great-hearted monkey king Sugreeva and has come to me here to seek his welfare.॥ 26॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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