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श्लोक 4.3.26  |
सचिवोऽयं कपीन्द्रस्य सुग्रीवस्य महात्मन:।
तमेव कांक्षमाणस्य ममान्तिकमिहागत:॥ २६॥ |
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| अनुवाद |
| सुमित्रनन्दन! ये महाहृदयी वानरराज सुग्रीव के सचिव हैं और अपना कल्याण चाहने के लिए मेरे पास आये हैं॥ 26॥ |
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| Sumitra Nandan! He is the secretary of the great-hearted monkey king Sugreeva and has come to me here to seek his welfare.॥ 26॥ |
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