श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 3: हनुमान जी का श्रीराम और लक्ष्मण से वन में आने का कारण पूछना और अपना तथा सुग्रीव का परिचय देना  »  श्लोक 18-19h
 
 
श्लोक  4.3.18-19h 
महाप्रमाणौ विपुलौ तप्तहाटकभूषणौ॥ १८॥
खड्गावेतौ विराजेते निर्मुक्तभुजगाविव।
 
 
अनुवाद
"तुम्हारी दोनों तलवारें बहुत बड़ी और चौड़ी हैं। वे शुद्ध सोने से सजी हैं। दोनों केंचुली उतारे हुए साँपों की तरह सुंदर लग रही हैं।"
 
‘Both of your swords are very large and wide. They are decorated with pure gold. Both of them look beautiful like snakes that have shed their skin.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)