श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 3: हनुमान जी का श्रीराम और लक्ष्मण से वन में आने का कारण पूछना और अपना तथा सुग्रीव का परिचय देना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  4.3.13 
यदृच्छयेव सम्प्राप्तौ चन्द्रसूर्यौ वसुंधराम्।
विशालवक्षसौ वीरौ मानुषौ देवरूपिणौ॥ १३॥
 
 
अनुवाद
तुम दोनों को देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो चन्द्रमा और सूर्य स्वेच्छा से इस पृथ्वी पर अवतरित हुए हों। तुम्हारी छाती विशाल है। तुम मनुष्य होते हुए भी देवताओं के समान रूपवान हो॥13॥
 
‘Looking at you both it seems as if the Moon and the Sun have willingly descended on this earth. Your chests are huge. Even though you are humans, your forms are like those of gods.॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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