श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 3: हनुमान जी का श्रीराम और लक्ष्मण से वन में आने का कारण पूछना और अपना तथा सुग्रीव का परिचय देना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  4.3.11 
प्रभया पर्वतेन्द्रोऽसौ युवयोरवभासित:।
राज्यार्हावमरप्रख्यौ कथं देशमिहागतौ॥ ११॥
 
 
अनुवाद
'आप दोनों के तेज से ऋष्यमूक पर्वत जगमगा रहा है। आप देवताओं के समान पराक्रमी हैं और राज्य भोगने के योग्य हैं। भला, इस दुर्गम वन प्रदेश में आपका आना कैसे संभव हुआ?॥11॥
 
‘The mountain Rishyamuk is shining with the radiance of both of you. You are as powerful as the gods and are worthy of enjoying the kingdom. Well, how was it possible for you to come to this inaccessible forest region?॥ 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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