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ramayan 4.29.23: 'उसने तुम्हारे लिए बालि के प्राण लेने में संकोच नहीं किया। उसने तुम्हारे लिए महान कार्य किया है; अतः अब हमें उसकी पत्नी विदेहकुमारी सीता को इस पृथ्वी पर और आकाश में भी खोजना चाहिए।'   |   ramayan सर्ग 4.29: हनुमान जी के समझाने से सुग्रीव का नील को वानर-सैनिकों को एकत्र करने का आदेश देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 29: हनुमान जी के समझाने से सुग्रीव का नील को वानर-सैनिकों को एकत्र करने का आदेश देना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  4.29.23 
प्राणत्यागाविशंकेन कृतं तेन महत् प्रियम्।
तस्य मार्गाम वैदेहीं पृथिव्यामपि चाम्बरे॥ २३॥
 
 
अनुवाद
'उसने तुम्हारे लिए बालि के प्राण लेने में संकोच नहीं किया। उसने तुम्हारे लिए महान कार्य किया है; अतः अब हमें उसकी पत्नी विदेहकुमारी सीता को इस पृथ्वी पर और आकाश में भी खोजना चाहिए।'
 
‘He did not hesitate to take Vali's life for you. He has done a great deed for you; hence, now we should search for his wife Videha Kumari Sita on this earth and in the sky as well.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)