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ramayan 4.29.16: हे राजन! परम बुद्धिमान श्री रामजी समय को जानते हैं और अपने कार्य को शीघ्रता से करने वाले हैं, फिर भी वे आपके वश में रहते हैं। संकोच के कारण वे आपसे यह नहीं कहते कि मेरे कार्य का समय बीत रहा है॥ 16॥   |   ramayan सर्ग 4.29: हनुमान जी के समझाने से सुग्रीव का नील को वानर-सैनिकों को एकत्र करने का आदेश देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 29: हनुमान जी के समझाने से सुग्रीव का नील को वानर-सैनिकों को एकत्र करने का आदेश देना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  4.29.16 
न च कालमतीतं ते निवेदयति कालवित्।
त्वरमाणोऽपि स प्राज्ञस्तव राजन् वशानुग:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! परम बुद्धिमान श्री रामजी समय को जानते हैं और अपने कार्य को शीघ्रता से करने वाले हैं, फिर भी वे आपके वश में रहते हैं। संकोच के कारण वे आपसे यह नहीं कहते कि मेरे कार्य का समय बीत रहा है॥ 16॥
 
‘O King! The most intelligent Shri Ram has knowledge of time and is in a hurry to accomplish his work, yet he remains under your control. Out of hesitation, he does not tell you that the time for my work is passing.॥ 16॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)