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संत्यज्य सर्वकर्माणि मित्रार्थे यो न वर्तते।
सम्भ्रमाद् विकृतोत्साह: सोऽनर्थैर्नावरुध्यते॥ १३॥
अनुवाद
जो व्यक्ति अपने अन्य सभी कार्यों को छोड़कर अपने मित्र के कार्य को पूर्ण करने में बड़े उत्साह और शीघ्रता से नहीं जुटता, उसे विपत्ति का सामना करना पड़ता है।
He who does not leave aside all his other works and get busy with the completion of his friend's work with great enthusiasm and haste, has to face disaster.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥