श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 28: श्रीराम के द्वारा वर्षा-ऋतु का वर्णन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  4.28.9 
एष फुल्लार्जुन: शैल: केतकैरभिवासित:।
सुग्रीव इव शान्तारिर्धाराभिरभिषिच्यते॥ ९॥
 
 
अनुवाद
यह पर्वत, जो अर्जुन वृक्षों से पुष्पित और केवड़ों से सुगन्धित है, शत्रुओं को शान्त करने वाले सुग्रीव के समान जल की धाराओं से अभिषिक्त हो रहा है॥9॥
 
This mountain, which is blooming with Arjuna trees and is fragrant with the Kewad (wooden) trees, is being anointed with streams of water like Sugreeva whose enemies have been pacified.॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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