श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 28: श्रीराम के द्वारा वर्षा-ऋतु का वर्णन  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  4.28.56 
नूनमापूर्यमाणाया: सरय्वा वर्धते रय:।
मां समीक्ष्य समायान्तमयोध्याया इव स्वन:॥ ५६॥
 
 
अनुवाद
‘जैसे मुझे वन की ओर आते देखकर अयोध्यावासियों का हाहाकार बढ़ गया था, वैसे ही इस समय वर्षा के जल से भरी हुई सरयू नदी का वेग भी बढ़ रहा होगा॥ 56॥
 
‘Just as the cries of the people of Ayodhya increased on seeing me approaching the forest, similarly, the speed of the river Saryu, filled with rainwater, must be increasing at this time.॥ 56॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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