श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 28: श्रीराम के द्वारा वर्षा-ऋतु का वर्णन  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  4.28.53 
वृत्ता यात्रा नरेन्द्राणां सेना पथ्येव वर्तते।
वैराणि चैव मार्गाश्च सलिलेन समीकृता:॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
राजाओं की युद्ध यात्रा रुक गई है। जो सेना निकली थी, उसने भी मार्ग में डेरा डाल दिया है। वर्षा ने राजाओं का वैर-भाव शांत कर दिया है और मार्ग भी अवरुद्ध कर दिया है। इस प्रकार वैर और मार्ग एक हो गए हैं॥ 53॥
 
‘The war march of the kings has stopped. The army which had set out has also camped on the way. The rains have pacified the enmity of the kings and have also blocked the way. In this way, the enmity and the way have become the same.॥ 53॥
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