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ramayan 4.27.6-7h: शत्रुदमन सुमित्राकुमार! यह पर्वतीय गुफा अत्यंत सुंदर और विशाल है। यहाँ हवा आने-जाने का मार्ग है। हम बरसात की रातों में इसी गुफा में रहेंगे। साढ़े छह।   |   ramayan सर्ग 4.27: प्रस्रवणगिरि पर श्रीराम और लक्ष्मण की परस्पर बातचीत   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  4.27.6-7h 
इयं गिरिगुहा रम्या विशाला युक्तमारुता॥ ६॥
अस्यां वत्स्याम सौमित्रे वर्षरात्रमरिंदम।
 
 
अनुवाद
शत्रुदमन सुमित्राकुमार! यह पर्वतीय गुफा अत्यंत सुंदर और विशाल है। यहाँ हवा आने-जाने का मार्ग है। हम बरसात की रातों में इसी गुफा में रहेंगे। साढ़े छह।
 
‘Shatrudaman Sumitrakumar! This mountain cave is very beautiful and huge. There is a way for air to come and go here. We will stay inside this cave on rainy nights. 6 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)