श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 27: प्रस्रवणगिरि पर श्रीराम और लक्ष्मण की परस्पर बातचीत  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  4.27.46 
तदेव युक्तं प्रणिधाय लक्ष्मण:
कृताञ्जलिस्तत् प्रतिपूज्य भाषितम्।
उवाच रामं स्वभिरामदर्शनं
प्रदर्शयन् दर्शनमात्मन: शुभम्॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
श्री रामजी की उस बात को युक्तिसंगत मानकर लक्ष्मणजी ने उसकी बहुत प्रशंसा की और हाथ जोड़कर अपना शुभ रूप दिखाते हुए सुन्दर श्री रामजी से इस प्रकार बोले-॥46॥
 
Accepting that statement of Shri Rama as reasonable, Lakshman praised it profusely and with folded hands, showing his auspicious look, he spoke to the beautiful Shri Ram in this manner -॥ 46॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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