Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 4.27.44: मैं आपका सुझाव स्वीकार करता हूँ। मैं शरद ऋतु की प्रतीक्षा करूँगा, सुग्रीव के प्रसन्न होकर मेरी सहायता करने तथा नदियों का जल स्वच्छ होने की प्रतीक्षा करूँगा। 44.   |   ramayan सर्ग 4.27: प्रस्रवणगिरि पर श्रीराम और लक्ष्मण की परस्पर बातचीत   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 27: प्रस्रवणगिरि पर श्रीराम और लक्ष्मण की परस्पर बातचीत  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  4.27.44 
शरत्कालं प्रतीक्षिष्ये स्थितोऽस्मि वचने तव।
सुग्रीवस्य नदीनां च प्रसादमनुपालयन्॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
मैं आपका सुझाव स्वीकार करता हूँ। मैं शरद ऋतु की प्रतीक्षा करूँगा, सुग्रीव के प्रसन्न होकर मेरी सहायता करने तथा नदियों का जल स्वच्छ होने की प्रतीक्षा करूँगा। 44.
 
‘I accept your suggestion. I will wait for the autumn season, waiting for Sugreeva to be happy and help me and for the water in the rivers to become clean. 44.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)