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ramayan 4.27.42: लक्ष्मण! आपने ठीक वही कहा है जो भक्त, प्रेमी, हितैषी, वीर एवं सत्यवादी पुरुष को कहना चाहिए ॥ 42॥   |   ramayan सर्ग 4.27: प्रस्रवणगिरि पर श्रीराम और लक्ष्मण की परस्पर बातचीत   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 27: प्रस्रवणगिरि पर श्रीराम और लक्ष्मण की परस्पर बातचीत  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  4.27.42 
वाच्यं यदनुरक्तेन स्निग्धेन च हितेन च।
सत्यविक्रमयुक्तेन तदुक्तं लक्ष्मण त्वया॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
लक्ष्मण! आपने ठीक वही कहा है जो भक्त, प्रेमी, हितैषी, वीर एवं सत्यवादी पुरुष को कहना चाहिए ॥ 42॥
 
Lakshmana! You have said exactly what a devotee, a loving, a well-wisher and a brave and truthful person should say. ॥ 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)