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ramayan 4.27.41: लक्ष्मण के इस शुभ एवं हितकर वचन की सराहना करते हुए श्री रघुनाथजी ने अपने प्रिय मित्र सुमित्राकुमार से इस प्रकार कहा-॥41॥   |   ramayan सर्ग 4.27: प्रस्रवणगिरि पर श्रीराम और लक्ष्मण की परस्पर बातचीत   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  4.27.41 
लक्ष्मणस्य हि तद् वाक्यं प्रतिपूज्य हितं शुभम्।
राघव: सुहृदं स्निग्धमिदं वचनमब्रवीत्॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
लक्ष्मण के इस शुभ एवं हितकर वचन की सराहना करते हुए श्री रघुनाथजी ने अपने प्रिय मित्र सुमित्राकुमार से इस प्रकार कहा-॥41॥
 
Appreciating this auspicious and beneficial word of Laxman, Shri Raghunath ji said to his dear friend Sumitra Kumar thus -॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)