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श्लोक 4.27.37  |
समुन्मूलय शोकं त्वं व्यवसायं स्थिरीकुरु।
तत: सपरिवारं तं राक्षसं हन्तुमर्हसि॥ ३७॥ |
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| अनुवाद |
| अतः अपने शोक को सर्वथा उखाड़ फेंको और अपने पुरुषार्थ के विचारों को स्थिर करो। तभी तुम अपने परिवार सहित उस राक्षस का नाश कर सकोगे॥ 37॥ |
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| ‘Therefore, uproot your grief completely and stabilize your thoughts of hard work. Only then can you destroy that demon along with your family.॥ 37॥ |
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