श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 27: प्रस्रवणगिरि पर श्रीराम और लक्ष्मण की परस्पर बातचीत  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  4.27.37 
समुन्मूलय शोकं त्वं व्यवसायं स्थिरीकुरु।
तत: सपरिवारं तं राक्षसं हन्तुमर्हसि॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
अतः अपने शोक को सर्वथा उखाड़ फेंको और अपने पुरुषार्थ के विचारों को स्थिर करो। तभी तुम अपने परिवार सहित उस राक्षस का नाश कर सकोगे॥ 37॥
 
‘Therefore, uproot your grief completely and stabilize your thoughts of hard work. Only then can you destroy that demon along with your family.॥ 37॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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