श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 27: प्रस्रवणगिरि पर श्रीराम और लक्ष्मण की परस्पर बातचीत  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  4.27.35 
भवान् क्रियापरो लोके भवान् देवपरायण:।
आस्तिको धर्मशीलश्च व्यवसायी च राघव॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
'रघुनंदन! आप संसार में कर्मठ, वीर तथा देवताओं का आदर करने वाले हैं। आप आस्तिक, धार्मिक और उद्योगी हैं।॥ 35॥
 
‘Raghunandan! You are a hardworking and brave person in the world and respect the gods. You are a believer, a religious person and an industrious person.॥ 35॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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