Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.27.34: वीर! इस प्रकार दुःखी होने से कोई लाभ नहीं है। अतः तुम्हें शोक नहीं करना चाहिए; क्योंकि यह बात तुमसे छिपी नहीं है कि शोक करने वाले मनुष्य की समस्त इच्छाएँ नष्ट हो जाती हैं ॥ 34॥ | ramayan सर्ग 4.27: प्रस्रवणगिरि पर श्रीराम और लक्ष्मण की परस्पर बातचीत । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अलं वीर व्यथां गत्वा न त्वं शोचितुमर्हसि।
शोचतो ह्यवसीदन्ति सर्वार्था विदितं हि ते॥ ३४॥
अनुवाद
वीर! इस प्रकार दुःखी होने से कोई लाभ नहीं है। अतः तुम्हें शोक नहीं करना चाहिए; क्योंकि यह बात तुमसे छिपी नहीं है कि शोक करने वाले मनुष्य की समस्त इच्छाएँ नष्ट हो जाती हैं ॥ 34॥
Veer! There is no use in getting distressed in this manner. Therefore you should not grieve; because it is not hidden from you that all the desires of a person who grieves are destroyed. ॥ 34॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥