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ramayan 4.27.31-32h: विशेष रूप से, क्षितिज पर चंद्रमा को उगते देखने के बाद, वह रात को बिस्तर पर लेटने के बाद भी सो नहीं पाता था।   |   ramayan सर्ग 4.27: प्रस्रवणगिरि पर श्रीराम और लक्ष्मण की परस्पर बातचीत   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 27: प्रस्रवणगिरि पर श्रीराम और लक्ष्मण की परस्पर बातचीत  »  श्लोक 31-32h
 
 
श्लोक  4.27.31-32h 
उदयाभ्युदितं दृष्ट्वा शशाङ्कं च विशेषत:॥ ३१॥
आविवेश न तं निद्रा निशासु शयनं गतम्।
 
 
अनुवाद
विशेष रूप से, क्षितिज पर चंद्रमा को उगते देखने के बाद, वह रात को बिस्तर पर लेटने के बाद भी सो नहीं पाता था।
 
In particular, after seeing the Moon rising on the horizon, he would not be able to sleep even after lying down on his bed at night. 31 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)