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श्लोक  4.27.29 
इत्युक्त्वा न्यवसत् तत्र राघव: सहलक्ष्मण:।
बहुदृश्यदरीकुञ्जे तस्मिन् प्रस्रवणे गिरौ॥ २९॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर श्रीराम और लक्ष्मण प्रस्रवण पर्वत पर रहने लगे, जहाँ अनेक गुफाएँ और कुंजियाँ थीं।
 
Having said this, Sri Rama and Lakshmana began to live on the Prasravan mountain where one could see many caves and bowers.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)