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श्लोक  4.27.26 
इतश्च नातिदूरे सा किष्किन्धा चित्रकानना।
सुग्रीवस्य पुरी रम्या भविष्यति नृपात्मज॥ २६॥
 
 
अनुवाद
राजकुमार! विचित्र कानों से सुशोभित सुग्रीव की सुन्दर किष्किन्धा नगरी भी यहाँ से अधिक दूर नहीं होगी।
 
Prince! Sugreeva's beautiful Kishkinda city, decorated with strange ears, will also not be very far from here.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)