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ramayan 4.27.24: वहाँ देखो, अर्जुन और चंदन के वृक्षों की पंक्तियाँ कितनी सुन्दर लग रही हैं। ऐसा प्रतीत होता है मानो वे मन के विचार मात्र से ही प्रकट हो गए हों॥ 24॥   |   ramayan सर्ग 4.27: प्रस्रवणगिरि पर श्रीराम और लक्ष्मण की परस्पर बातचीत   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 27: प्रस्रवणगिरि पर श्रीराम और लक्ष्मण की परस्पर बातचीत  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  4.27.24 
पश्य चन्दनवृक्षाणां पङ्‍क्ति: सुरुचिरा इव।
ककुभानां च दृश्यन्ते मनसैवोदिता: समम्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
वहाँ देखो, अर्जुन और चंदन के वृक्षों की पंक्तियाँ कितनी सुन्दर लग रही हैं। ऐसा प्रतीत होता है मानो वे मन के विचार मात्र से ही प्रकट हो गए हों॥ 24॥
 
‘Look there, how beautiful the rows of Arjun and Sandalwood trees look. It seems as if they have appeared just by the thought of the mind.॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)