श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 27: प्रस्रवणगिरि पर श्रीराम और लक्ष्मण की परस्पर बातचीत  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  4.27.23 
पारिप्लवशतैर्जुष्टा बर्हिक्रौञ्चविनादिता।
रमणीया नदी सौम्य मुनिसङ्घनिषेविता॥ २३॥
 
 
अनुवाद
सैकड़ों जलपक्षियों से युक्त तथा मोर और कौओं के कलरव से संगीतमय यह कोमल नदी अत्यंत सुन्दर प्रतीत होती है। ऋषियों के समुदाय इसका जल पीते हैं॥ 23॥
 
‘This gentle river, attended by hundreds of water-birds and sung by the chirping of peacocks and crows, appears very beautiful. Communities of sages drink its water.॥ 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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