श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 27: प्रस्रवणगिरि पर श्रीराम और लक्ष्मण की परस्पर बातचीत  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  4.27.20 
शतश: पक्षिसङ्घैश्च नानानादविनादिता।
एकैकमनुरक्तैश्च चक्रवाकैरलंकृता॥ २०॥
 
 
अनुवाद
सैकड़ों पक्षियों के झुंडों से युक्त यह नदी उनके विविध कलरवों से गूंजती रहती है। चक्रवाक एक-दूसरे पर मोहित होकर इस नदी की शोभा बढ़ाते हैं।
 
‘This river, united with hundreds of flocks of birds, resounds with their various chirps. The Chakravaks, enamoured with each other, enhance the beauty of this river.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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