श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 27: प्रस्रवणगिरि पर श्रीराम और लक्ष्मण की परस्पर बातचीत  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  4.27.16 
प्राचीनवाहिनीं चैव नदीं भृशमकर्दमाम्।
गुहाया: परत: पश्य त्रिकूटे जाह्नवीमिव॥ १६॥
 
 
अनुवाद
'वहाँ देखो, इस गुफा के उस पार त्रिकूट पर्वत के पास मंदाकिनी के समान तुंगभद्रा नदी बह रही है। उसकी धारा पश्चिम से पूर्व की ओर बह रही है। उसमें कीचड़ का लेशमात्र भी नहीं है।॥16॥
 
‘Look there, on the other side of this cave, the Tungabhadra river is flowing like the Mandakini near the Trikuta mountain. Its current is flowing from west to east. There is not even a trace of mud in it.॥ 16॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd