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ramayan 4.27.14: हे पिता! देखो, उत्तर दिशा से यह सुन्दर पर्वत शिखर कटे हुए कोयले के ढेर और घूमते हुए बादलों के समान काला दिखाई देता है॥14॥   |   ramayan सर्ग 4.27: प्रस्रवणगिरि पर श्रीराम और लक्ष्मण की परस्पर बातचीत   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 27: प्रस्रवणगिरि पर श्रीराम और लक्ष्मण की परस्पर बातचीत  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  4.27.14 
गिरिशृङ्गमिदं तात पश्य चोत्तरत: शुभम्।
भिन्नाञ्जनचयाकारमम्भोधरमिवोदितम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
हे पिता! देखो, उत्तर दिशा से यह सुन्दर पर्वत शिखर कटे हुए कोयले के ढेर और घूमते हुए बादलों के समान काला दिखाई देता है॥14॥
 
‘Father! Look, from the north this beautiful mountain peak appears as black as a pile of cut coal and a cloud of swirling clouds.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)