श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 27: प्रस्रवणगिरि पर श्रीराम और लक्ष्मण की परस्पर बातचीत  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  4.27.12 
प्रागुदक्प्रवणे देशे गुहा साधु भविष्यति।
पश्चाच्चैवोन्नता सौम्य निवातेयं भविष्यति॥ १२॥
 
 
अनुवाद
सौम्य! यहाँ का स्थान उत्तर-पूर्व की ओर नीचा है, अतः यह गुफा हमारे रहने के लिए बहुत अच्छी रहेगी। दक्षिण-पश्चिम कोने की ओर ऊँची यह गुफा हवा और वर्षा से रक्षा के लिए उत्तम रहेगी।*॥12॥
 
‘Soumya! The place here is low towards the northeast, so this cave will be very good for our stay. This cave which is high towards the southwest corner will be good for protection from wind and rain*॥ 12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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