श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 27: प्रस्रवणगिरि पर श्रीराम और लक्ष्मण की परस्पर बातचीत  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  4.27.11 
इयं च नलिनी रम्या फुल्लपङ्कजमण्डिता।
नातिदूरे गुहाया नौ भविष्यति नृपात्मज॥ ११॥
 
 
अनुवाद
"राजकुमार! यह तालाब खिले हुए कमलों से सजा हुआ बहुत सुंदर लग रहा है। यह हमारी गुफा से ज़्यादा दूर नहीं होगा।"
 
‘Prince! This pond looks very beautiful, decorated with blooming lotuses. It will not be very far from our cave.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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