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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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सर्ग 27: प्रस्रवणगिरि पर श्रीराम और लक्ष्मण की परस्पर बातचीत
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श्लोक 10
श्लोक
4.27.10
मालतीकुन्दगुल्मैश्च सिन्दुवारै: शिरीषकै:।
कदम्बार्जुनसर्जैश्च पुष्पितैरुपशोभितम्॥ १०॥
अनुवाद
'मालती और कुंद की झाड़ियाँ, और सिंदुवार, शिरीष, कदम्ब, अर्जुन और सरजा के फूल वाले पेड़ इस स्थान की सुंदरता को बढ़ाते हैं।' 10॥
‘Bushes of malati and kunda, and flowering trees of sinduvaar, shirish, kadamba, arjun and sarja enhance the beauty of this place.॥ 10॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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