Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.25.9: (मेरे वध के कारण) वह वानरराज के शरीर से मुक्त होकर अपने शुद्ध स्वरूप को प्राप्त हो गया है। उसने वे सभी पुण्य कर्म भी प्राप्त कर लिए हैं जो साम, दान और अर्थ के उचित उपयोग से नीति के अनुसार प्राप्त होते हैं।॥9॥ | ramayan सर्ग 4.25: श्रीराम का सुग्रीव, तारा और अङ्गद को समझाना तथा वाली के दाह-संस्कार के लिये आज्ञा प्रदान करना,अङ्गद के द्वारा उसका दाह-संस्कार कराना और उसे जलाञ्जलि देना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
(मेरे वध के कारण) वह वानरराज के शरीर से मुक्त होकर अपने शुद्ध स्वरूप को प्राप्त हो गया है। उसने वे सभी पुण्य कर्म भी प्राप्त कर लिए हैं जो साम, दान और अर्थ के उचित उपयोग से नीति के अनुसार प्राप्त होते हैं।॥9॥
‘He has attained his pure form (due to my killing) by being freed from the body of the monkey king. He has also attained all the pious deeds which are obtained by the proper use of Sama, Dana and Artha as per the ethics.॥ 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥