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ramayan 4.25.8: अतः बुद्धिमान् और विवेकशील पुरुष को चाहिए कि वह सब कुछ काल का फल समझे। धर्म, अर्थ और काम भी समय आने पर ही प्राप्त होते हैं।॥8॥   |   ramayan सर्ग 4.25: श्रीराम का सुग्रीव, तारा और अङ्गद को समझाना तथा वाली के दाह-संस्कार के लिये आज्ञा प्रदान करना,अङ्गद के द्वारा उसका दाह-संस्कार कराना और उसे जलाञ्जलि देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 25: श्रीराम का सुग्रीव, तारा और अङ्गद को समझाना तथा वाली के दाह-संस्कार के लिये आज्ञा प्रदान करना,अङ्गद के द्वारा उसका दाह-संस्कार कराना और उसे जलाञ्जलि देना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  4.25.8 
किं तु कालपरीणामो द्रष्टव्य: साधु पश्यता।
धर्मश्चार्थश्च कामश्च कालक्रमसमाहिता:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
अतः बुद्धिमान् और विवेकशील पुरुष को चाहिए कि वह सब कुछ काल का फल समझे। धर्म, अर्थ और काम भी समय आने पर ही प्राप्त होते हैं।॥8॥
 
‘Therefore, a wise and prudent man should consider everything to be the result of time. Dharma, Artha and Kama are also achieved in due course of time.॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)