श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 25: श्रीराम का सुग्रीव, तारा और अङ्गद को समझाना तथा वाली के दाह-संस्कार के लिये आज्ञा प्रदान करना,अङ्गद के द्वारा उसका दाह-संस्कार कराना और उसे जलाञ्जलि देना  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  4.25.51 
संस्कृत्य वालिनं तं तु विधिवत् प्लवगर्षभा:।
आजग्मुरुदकं कर्तुं नदीं शुभजलां शिवाम्॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार विधिपूर्वक वालि का दाह-संस्कार करके सभी वानर जल से परिपूर्ण शुभ तुंगभद्रा नदी के तट पर जल अर्पण करने के लिए आये ॥51॥
 
In this way, after duly cremating Vali, all the monkeys came to the banks of the auspicious Tungabhadra river filled with holy water to offer water offering. 51॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas