Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.25.5: ‘कोई भी मनुष्य स्वतंत्र रूप से कोई कार्य नहीं कर सकता, न ही उसमें किसी अन्य को लगाने की शक्ति है। सम्पूर्ण जगत् प्रकृति के अधीन है और प्रकृति का आधार काल है।॥5॥ | ramayan सर्ग 4.25: श्रीराम का सुग्रीव, तारा और अङ्गद को समझाना तथा वाली के दाह-संस्कार के लिये आज्ञा प्रदान करना,अङ्गद के द्वारा उसका दाह-संस्कार कराना और उसे जलाञ्जलि देना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
‘कोई भी मनुष्य स्वतंत्र रूप से कोई कार्य नहीं कर सकता, न ही उसमें किसी अन्य को लगाने की शक्ति है। सम्पूर्ण जगत् प्रकृति के अधीन है और प्रकृति का आधार काल है।॥5॥
‘No man can do any work independently, nor does he have the power to engage anyone else in it. The whole world is subject to nature and the basis of nature is time.॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥