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ramayan 4.25.49: इसके बाद दुःख से पीड़ित इन्द्रिय वाले अंगद ने सुग्रीव की सहायता से अपने पिता को चिता पर लिटा दिया॥49॥   |   ramayan सर्ग 4.25: श्रीराम का सुग्रीव, तारा और अङ्गद को समझाना तथा वाली के दाह-संस्कार के लिये आज्ञा प्रदान करना,अङ्गद के द्वारा उसका दाह-संस्कार कराना और उसे जलाञ्जलि देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 25: श्रीराम का सुग्रीव, तारा और अङ्गद को समझाना तथा वाली के दाह-संस्कार के लिये आज्ञा प्रदान करना,अङ्गद के द्वारा उसका दाह-संस्कार कराना और उसे जलाञ्जलि देना  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  4.25.49 
सुग्रीवेण तत: सार्धं सोऽङ्गद: पितरं रुदन्।
चितामारोपयामास शोकेनाभिप्लुतेन्द्रिय:॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद दुःख से पीड़ित इन्द्रिय वाले अंगद ने सुग्रीव की सहायता से अपने पिता को चिता पर लिटा दिया॥49॥
 
After this, with the help of Sugriva, Angada, the pain-stricken senses, placed his father on the funeral pyre. 49॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)