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ramayan 4.25.46: महाराज! ये तार आदि, आपके सचिव और ये ग्रामवासी आपको चारों ओर से घेरे हुए हैं और दुःखी हो रहे हैं।   |   ramayan सर्ग 4.25: श्रीराम का सुग्रीव, तारा और अङ्गद को समझाना तथा वाली के दाह-संस्कार के लिये आज्ञा प्रदान करना,अङ्गद के द्वारा उसका दाह-संस्कार कराना और उसे जलाञ्जलि देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 25: श्रीराम का सुग्रीव, तारा और अङ्गद को समझाना तथा वाली के दाह-संस्कार के लिये आज्ञा प्रदान करना,अङ्गद के द्वारा उसका दाह-संस्कार कराना और उसे जलाञ्जलि देना  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  4.25.46 
एते हि सचिवा राजंस्तारप्रभृतयस्तव।
पुरवासिजनश्चायं परिवार्य विषीदति॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
महाराज! ये तार आदि, आपके सचिव और ये ग्रामवासी आपको चारों ओर से घेरे हुए हैं और दुःखी हो रहे हैं।
 
King! These telegrams etc., your secretaries and these villagers are surrounding you from all sides and feeling sad.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)