Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.25.32: इस पृथ्वी पर जैसे राजाओं का अन्तिम संस्कार उनकी बढ़ी हुई समृद्धि के अनुसार बड़े धूमधाम से किया जाता है, उसी प्रकार समस्त वानरों को अपने स्वामी महाराज वालि के अन्तिम संस्कार पर बहुत धन व्यय करना चाहिए।’ ॥32॥ | ramayan सर्ग 4.25: श्रीराम का सुग्रीव, तारा और अङ्गद को समझाना तथा वाली के दाह-संस्कार के लिये आज्ञा प्रदान करना,अङ्गद के द्वारा उसका दाह-संस्कार कराना और उसे जलाञ्जलि देना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राज्ञामृद्धिविशेषा हि दृश्यन्ते भुवि यादृशा:।
तादृशैरिह कुर्वन्तु वानरा भर्तृसत्क्रियाम्॥ ३२॥
अनुवाद
इस पृथ्वी पर जैसे राजाओं का अन्तिम संस्कार उनकी बढ़ी हुई समृद्धि के अनुसार बड़े धूमधाम से किया जाता है, उसी प्रकार समस्त वानरों को अपने स्वामी महाराज वालि के अन्तिम संस्कार पर बहुत धन व्यय करना चाहिए।’ ॥32॥
On this earth, just as the last rites of kings are performed with great pomp and show according to their increased prosperity, in the same way, all the monkeys should spend a lot of money on the last rites of their master Maharaja Vali.' ॥ 32॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥