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ramayan 4.25.22: वह दिव्य पालकी रथ के समान बनी हुई थी। उसके मध्य में राजा के बैठने के लिए एक सुंदर आसन था। उसमें कारीगरों ने कृत्रिम पक्षी और वृक्ष बनाए थे, जो उस पालकी को अत्यंत सुंदर बना रहे थे।   |   ramayan सर्ग 4.25: श्रीराम का सुग्रीव, तारा और अङ्गद को समझाना तथा वाली के दाह-संस्कार के लिये आज्ञा प्रदान करना,अङ्गद के द्वारा उसका दाह-संस्कार कराना और उसे जलाञ्जलि देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 25: श्रीराम का सुग्रीव, तारा और अङ्गद को समझाना तथा वाली के दाह-संस्कार के लिये आज्ञा प्रदान करना,अङ्गद के द्वारा उसका दाह-संस्कार कराना और उसे जलाञ्जलि देना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  4.25.22 
दिव्यां भद्रासनयुतां शिबिकां स्यन्दनोपमाम्।
पक्षिकर्मभिराचित्रां द्रुमकर्मविभूषिताम्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
वह दिव्य पालकी रथ के समान बनी हुई थी। उसके मध्य में राजा के बैठने के लिए एक सुंदर आसन था। उसमें कारीगरों ने कृत्रिम पक्षी और वृक्ष बनाए थे, जो उस पालकी को अत्यंत सुंदर बना रहे थे।
 
That divine palanquin was made like a chariot. In the middle of it was a beautiful seat for the king to sit. Artificial birds and trees were made by the craftsmen in it, which were making that palanquin very beautiful.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)