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ramayan 4.25.2: शोक और विलाप करने से मृतक का कोई भला नहीं होता। इसलिए जो कुछ तुम्हारा कर्तव्य है, उसे विधिपूर्वक पूरा करो॥ 2॥   |   ramayan सर्ग 4.25: श्रीराम का सुग्रीव, तारा और अङ्गद को समझाना तथा वाली के दाह-संस्कार के लिये आज्ञा प्रदान करना,अङ्गद के द्वारा उसका दाह-संस्कार कराना और उसे जलाञ्जलि देना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 25: श्रीराम का सुग्रीव, तारा और अङ्गद को समझाना तथा वाली के दाह-संस्कार के लिये आज्ञा प्रदान करना,अङ्गद के द्वारा उसका दाह-संस्कार कराना और उसे जलाञ्जलि देना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  4.25.2 
न शोकपरितापेन श्रेयसा युज्यते मृत:।
यदत्रानन्तरं कार्यं तत् समाधातुमर्हथ॥ २॥
 
 
अनुवाद
शोक और विलाप करने से मृतक का कोई भला नहीं होता। इसलिए जो कुछ तुम्हारा कर्तव्य है, उसे विधिपूर्वक पूरा करो॥ 2॥
 
Mourning and wailing does no good to the dead. Therefore, whatever duty is left for you, you must carry it out lawfully.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)